बिना हाथ पैर के बने काबिल ऑफिसर





यह कहानी है एक महेंद्र प्रताप की, जिसने एक हादसे की वजह से मात्र ५ वर्ष की उम्र में अपने हाथ पैर खो दिए थे | इस वजह से उन्हें 10 वर्ष तक पढाई से हाथ धोना पडा | लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, जिसके फलस्वरूप आज वे ऑयल एंड नेचुरल कोर्पोरेसन (ONGC)  में फाइनेंलशयल एंड अकाउंट्स ऑफिसर की पोस्ट पर है | अपनी ऐसी हालत के बावजूद भी उन्होंने फाइनेंश में MBA की थी |


हादसे का कारण


29 वर्ष के प्रताप हेदराबाद के रहने वाले है | जब वे 5 वर्ष के थे तब दोस्तों ने एक सरत लगायी थी की वे खुली इलेक्ट्रीड रोड को नहीं मोड़ सकते | उस समय उनकी इतनी समझ नहीं थी जिसके कारन उन्होंने सरत स्वीकार कर ली | लेकिन जेसी ही रोड को मोड़ने के लिए वो हाई वोल्टेज के सपेट में आ गये | इससे उनकी हाथ पैर जुलस गये | चोट इतनी तेज थी की अंत में उनके हाथ पैर काटने पड़े |

नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया



इस घटना के बाद प्रताप एक तरह से घर के अन्दर ही केद होकर रह गये | जिस कारन से वे 10 वर्ष तक स्कुल भी नहीं जा सके | यहाँ तक की उनके पिता भी उनको एक बोज समजने लगे | लेकिन प्रताप ने हार नहीं मानी | वे १६ वर्ष की उम्र तक स्कुल नहीं जा पाए |  प्रताप की 3 बहने थी जिन्होंने प्रताप का काफी सपोर्ट किया | धीरे धीरे प्रताप घुटनों के बल पर चलने लगे | उन्हें पहले काफी परेशानी हुई, लेकिन वे हिम्मत नहीं हारे | धीरे धीरे वे जबड़े और कोहनियों की मदत से वस्तुओ को पकड़ने लगे तथा कोहनियों की सहायता से लिखने भी लगे | मेहनत तथा लगन के कारन धीरे धीरे वे कंप्यूटर को भी ओपरेट करने लगे | वे आज ONGC  के दप्तर में बड़ी कुशलता के काम करते नजर आते है | प्रताप बगेर किसी सहायता के चल लेते है | यहां तक की वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी आसानी से सफर कर लेते हैं | वे कम्पनी के द्वारा प्रदान किये हुए क्वाटर में रहते है तथा कपडे धोने से लेकर नास्ता बनाने का काम खुद करते है | 

खुद को नोकरी के लिए तैयार करना

प्रताप ने 10वी तथा 12वी की परीक्षा की पढाई घर से ही की | केवल वे परीक्षा देने ही घर से बहार जाते थे | घर से बहार चलने के लिए उन्होंने कोब्लर से स्पेशल सेंडल बनवाई थी | उन्होंने हैदराबाद की ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से B.com तथा बादमे फायनेंस में MBA  किया | MBA करने के बाद उनके पास इंटरव्यू के लिए कई कॉल आते थे, लेकिन इंटरव्यूवर उन्हें देखने के बाद रिजेक्ट कर देता था | बहुत बार ऐसा होने पर भी प्रताप ने हार नहीं मानी | उन्होंने नोकरी के लिए अपना संघर्ष जारी रखा | अंततः उन्हें नेशनल हाउसिंग बेंक में असिस्टेंट मेनेजर की जॉब मिली | बादमे वे ONGC  अहमदाबाद में फायनेंस एंड अकाउंट ऑफिसर बने |

धीरे धीरे प्रताप के प्रति लोगो का नजरिया बदलने लगा | आज उनके सभी सहयोगी उनके टेलेंट और वर्किंग केपेसिटी की तारीफ करते नहीं थकते | जिस पिता ने उम्मीद छोड़ दी थी, आज उनका भी नजरिया बदल चूका है |